साझी-विरासत
साझी-विरासत
गुलाब को नहीं जानते आप
और वह भी आपको नहीं जानता
और सच्चाई तो यह है कि
मैं भी पूरी तरह नहीं जानता
गुलाब के बारे में क्योंकि
वह मौका ही नहीं देता जानने का
गुलाब ढोलकिया है हमारे इलाके का नामी
वह रतजगे और जागरण में भी ढोलक बजाता है
और
कव्वालों और हिंजड़ों के साथ भी ढोलक
बजाता है
हनुमान जी के मन्दिर में भी ढोलक बजाता
है गुलाब
और पीर के चिल्ले पर भी बजाता है हर
शुक्रवार
गुलाब ढाढ़ी है
गुलाब मिरासी है
पाँचों वक़्त की नमाज़ पढ़ता है गुलाब
और
सुबह जागते ही
गायत्री मंत्र बोलते हुये सूर्य को हाथ
जोड़ता है
मुसलमानों से मिलते समय अस्सलाम वालेकुम
बोलता है गुलाब
हिन्दुओं से मिलता है तो हाथ जोड़ कर
राम राम करता है
गुलाब रोज़े रखता है पूरे महिने भर तक
और
पूरे महिने ही कार्तिक स्नान करता है हर
वर्ष
गुलाब के बच्चे गायें चराते हैं दिन भर
बस्ती वालों की
और "तेरी भूरी भी चराई,तेरी काळी भी
चराई" गाते हुये
हर महिने उगाही करने जाते हैं घर-घर
जबकि
गुलाब की पत्नी ढप बजाते हुये बधावे
गाने जाती है
सगाई ब्याह और जळवा माँडळे के मौकों पर
यजमानों के
गुलाब ईद पर नये कपड़े पहन कर ईदगाह
जाता है
दीवाली पर नये कपड़े पहन कर दीपक जलाता
है गुलाब
होली पर रंग खेलता है
मुहर्रम पर मर्सिया गाता है
गुलाब हर साल अलीबख़्शी ख़्याल देखने
जाता है बहरोड़
और भट्ट जी का तमाशा देखने आमेर भी जाता
है प्राय:
गुलाब लुँगी बाँधता है चौखाने वाली
रेशमी
गुलाब दो लाँग की सूती धोती पहनता है
गुलाब वसंत पंचमी के दिन सरसों के फूल
ले कर आता है
इदुल फितर पर गुलाब की पंखुड़ियाँ
बांटता है घर घर में
आप गुलाब को नहीं जानते
और वह भी आपको नहीं जानता
और मैं जो उसके बारे में इतना जानता हूँ
तो भी
मुझे पता नहीं पक्के तौर पर कि
वह गुलाब खाँ है या गुलाब चन्द
अथवा गुलाब मोहम्मद है या गुलाब राम
गुलाब मुझे सांझे हिन्दुस्तान की सच्ची
विरासत लगता है .
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